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धर्म के नाम पर वोट मांगना गलतः सुप्रीम कोर्ट

Edited By: Editor
Updated On : 2016-10-21 10:22:24
धर्म के नाम पर वोट मांगना गलतः सुप्रीम कोर्ट
धर्म के नाम पर वोट मांगना गलतः सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह साफ किया कि धर्म और राजनीति को मिक्स नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि धर्म के नाम पर वोट नहीं मांगा जा सकता है और चुनावी लड़ाई के लिए धर्म का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की बेंच के सामने धर्म के नाम पर वोट मांगने से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा कि इस मामले में संसद ने पिछले 20 साल में कुछ नहीं किया है। चीफ जस्टिस ने कहा कि चुनावी लड़ाई के लिए धर्म का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि धर्म के आधार पर वोट नहीं मांगा जाना चाहिए। अगर चुनावी प्रक्रिया में धर्म को किसी भी तरह से इजाजत दी गई तो चुनाव से संबंधित कानून बेमतलब हो जाएगा। अदालत ने कहा कि धर्म को परिभाषित करना कोर्ट के सामने मुद्दा नहीं है बल्कि हमारे सामने मुद्दा यह है कि क्या धर्म के नाम पर वोट मांगना जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत भ्रष्ट प्रैक्टिस माना जाएगा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार का कोई समर्थक वोटरों से धर्म के नाम पर वोट की अपील करता है तो क्या ये भ्रष्ट प्रैक्टिस माना जाएगा। बीजेपी उम्मीदवार के वकील श्याम दिवान ने दलील दी कि जहां तक जन प्रतिनिधित्व कानून का सवाल है तो उसकी धारा 123 कहता है कि धर्म के नाम पर वोट मांगना या फिर वोट न देने का अनुरोध करने का मामला सिर्फ उम्मीदवार या फिर उसके विरोधी उम्मीदवार के लिए है।

अन्य किसी पर यह लागू नहीं होगा। हालांकि उम्मीदवार के समर्थक अगर ऐसा करता है तो भी यह गलत होगा। इस आधार पर विजयी उम्मीदवार का रिजल्ट रद्द हो सकता है।


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