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जनता दरबार लगाने के फैसले की क्यों निकल गई हवा ?

Edited By: Ankur Maurya
Updated On : 2017-11-21 22:44:30
जनता दरबार लगाने के फैसले की क्यों निकल गई हवा ?
जनता दरबार लगाने के फैसले की क्यों निकल गई हवा ?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बीजेपी मुख्यालय से अपने मंत्रियों की ड्यूटी हटा ली है। मंत्रियों के बजाय अब बीजेपी मुख्यालय में केवल सीएम महीने में एक दिन बैठेंगे और मंत्री पार्टी मुख्यालय के बजाय अपने प्रभार वाले जिलों में जनता दरबार लगाएंगे। इन सबके बीच अब सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि आखिर ढाई महीने में ही पार्टी मुख्यालय में जनता दरबार लगाने के फैसले की हवा क्यों निकल गई ?

बीजेपी संगठन की मांग पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने हर मंत्री की बीजेपी मुख्यालय में ड्यूटी लगाई थी, जिसके तहत हर दिन एक मंत्री को मुख्यालय में बैठकर कर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आम जनता की समस्याओं को सुनना था, लेकिन मंत्रियों के दरबार चले कम बंद ज्यादा हो रहे हैं।

दरबार नहीं चलने से फरयादियों की संख्या भी घटती चली गई। अब आखिरकार मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ये फैसला लिया है कि ऐसे हालात में जनता दरबार नहीं चलाया जा सकता है, अब केवल सीएम महीने में एक दिन बीजेपी मुख्यालय में जनता की समस्याओं को सुनेंगे।

बीजेपी मुख्यालय में मंत्रियों का जनता दरबार सुचारू रूप से चलने के बजाय बंद रहने के लिये ज्यादा चर्चाओं में रहा। मंत्रियों के दरबार में नहीं आने से फरियादियों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा था। कई बार स्थिति ये भी देखी गई कि बिना शेड्यूल के मंत्री जनता दरबार में पहुंच तो गए। पर उस दिन जनता दरबार में पहुंच ही नहीं सकी। बीजेपी मुख्यालय में जनता दरबार की परंपरा बंद होने के मंत्री अपने अपने तर्क दे रहे हैं, मगर विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी का जनता दरबार महज एक दिखावा भरा था।


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