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जांच के घेरे में 'यश भारती' अवॉर्ड, CM योगी कराएंगे जांच

Edited By: Hindi Khabar
Updated On : 2017-04-21 04:07:13
जांच के घेरे में 'यश भारती' अवॉर्ड, CM योगी कराएंगे जांच
जांच के घेरे में 'यश भारती' अवॉर्ड, CM योगी कराएंगे जांच

लखनऊ। यूपी में मिलने वाला राज्य का सबसे बड़ा सम्मान यश भारती की जांच की जाएगी। यह जांच राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ करवाएंगे। इस सम्मान को मुलायम सिंह यादव ने 1994 में शुरु किया था। यह सम्मान राज्य के ऐसे लोग, जिन्होंने कला, संस्कृति, साहित्य या खेलकूद के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया है, उनको दिए जाते है। इसके अंतर्गत 11 लाख रुपए के अलावा पूरी उम्र तक 50 हजार रुपए दिए जाते है।

यह पुरस्कार हरिवंश राय बच्चन, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, जया बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, शुभा मुद्गल, रेखा भारद्वाज, रीता गांगुली, कैलाश खेर, अरुणिमा सिन्हा, नवाज़ुद्दीन सिद्द़ीकी़, नसीरूद्दीन शाह, रविंद्र जैन, भुवनेश्वर कुमार जैसी लोगों को दिया जा चुका है।

बसपा सुप्रीमो मायवाती ने अपनी सरकार आने पर यह पुरस्कार बंद कर दिए थे, लेकिन 2012 में अखिलेश यादव सरकार ने इसे दोबारा शुरू कर दिया। इस बार इस पुरस्कार को लेकर काफी सवाल उठे और आरोप लगे कि अखिलेश यादव ने तमाम गरीब लोगों को आर्थिक मदद करने के लिए यश भारती पुरस्कार दे दिया।

जब मुख्यमंत्री के नए दफ्तर लोक भवन के सभागार में अखिलेश यादव ने पुरस्कार समारोह का संचालन करने वाली महिला को भी खुश होकर मंच से ही यश भारती पुरस्कार देने का ऐलान कर दिया तो उनके इस कदम पर काफी सवाल खड़े हुए।

समाजवादी पार्टी दफ्तर में काम करने वाले दो कर्मचारियों को पत्रकारिता की श्रेणी में यूपी का सबसे बड़ा पुरस्कार दे दिया गया, जिनका पत्रकारिता से कोई वास्ता ही नहीं था। अखिलेश के इस फैसले पर भी काफी सवाल उठे।

सीएम योगी का कहना है कि गलत लोगों को पुरस्कार देकर इस सम्मान की गरिमा नहीं गिरानी चाहिए। पुरस्कार पाने वालो की जांच की जाएगी, अगर पुरस्कार पाने वाले इसके हक़दार नहीं थे तो उनसे सम्मान तो अब वापस नहीं हो सकता, लेकिन उनको ताउम्र मिलने वाली 50 हज़ार रुपए महीना पेंशन बंद हो सकती है। वैसे अमिताभ बच्चन परिवार को यह पुरस्कार मिला है, लेकिन वह इसके अंतर्गत मिलने वाली पेंशन नहीं लेते है।


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