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गोवर्धन पूजा के दिन होती है गायों की पूजा

Edited By: Editor
Updated On : 2016-10-30 21:51:39
गोवर्धन पूजा के दिन होती है गायों की पूजा
गोवर्धन पूजा के दिन होती है गायों की पूजा

 नई दिल्ली। दिवाली के बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है। इस दिन बलि पूजा अन्न कूट, मार्गपाली आदि उत्सव भी मनाए दाते हैं। भारतीय शास्त्रों के अनुसार इस दिन अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग की शुरूआत हुई थी। 
 
 
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा भी की जाती है। भारतीय पुराणों में गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक देवी लक्ष्मी जिस तरह घर में वास करके लोगों को धन और समृद्धि देती है, ठीक उसी प्रकार गाय का दूध इंसान का स्वास्थ्य लाभ देता है।
 
 
दिवाली के अगले दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धननाथ जी की अल्पना का निर्माण कर पूजन करते हैं।इसके बाद गिरिराज भगवान को प्रसन्न करने के लिए अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। गिरिराज भगवान  को ब्रज का देवता भी कहा जाता है।
 
ऐसा माना जाता है कि गायों की इस दिन पूजा करने और गायों को मीठा खिलाने और उनकी आरती करने से गौमाता प्रसन्न होती है।
 
पुराणों में कहा गया है भगवान कृष्ण का इंद्र के मान मर्दन के पीछे उद्देश्य था कि ब्रजवासी गौ धन एवं पर्यावरण के महत्व को समझें और उनकी रक्षा करें। आज भी हमारे जीवन में गायों का विशेष महत्व है। इस दिन प्रसन्न होकर इस उत्सव को सम्पूर्ण भाव से मनाना चाहिए।

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