महोबा में नवरात्र और मुहर्रम पर देखने को मिल रही भाईचारे की मिसाल

Edited by: Editor Updated: 06 Oct 2016 | 09:41 PM
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महोबा। बुंदेलखंड का महोबा जनपद अपने आपसी सोहार्द के लिए पहचाना जाता है। महोबा के वीर आल्हा ऊदल और उनके गुरु ताला सैय्यद यहाँ के भाईचारे के प्रतीक है। नवरात्रि पर्व और मुहर्रम के एक साथ होने से दोनों ही धर्म के लोग भाईचारे और आपसी सोहार्द से इस पर्व को मना रहे है। एक दूसरे से किसी को कोई धार्मिक तकलीफ न हो इसका दोनों ही धर्म के लोग विशेष ध्यान रख रहे है।


दोनों धर्मों के त्यौहार एक साथ आ जाने के कारण प्रशासन लगातार सतर्कता बरता है ताकि किसी की आस्था को ठेस ना पहुंचे। लेकिन यहां के लोगों के भाईचारे को देखकर तो प्रशासन भी हैरान है।

दोनों ही धर्मों के धर्मगुरु और लोग दोनों ही पर्वों को आपसी भाईचारे से मना रहे है। किसी के भी कार्यक्रम में कोई विध्न पैदा न हो इसका दोनों ही संप्रदाय के लोग ख्याल रख रहे है। महोबा शहर में इस नवरात्री पर विभिन्न स्थानों पर लगभग 200 देवी पंडाल स्थापित है वहीं मुहर्रम पर्व में भी जगह जगह ढोल, और गिरोह निकल रही है। इमामबाड़ों में मजलिसे हो रही है। मगर दोनों ही कार्यक्रमों से एक दूसरे की भावनाये आहत न हो इसका ध्यान भी दें रहे है। देवी पंडालों में होने वाली शाम को 8 बजे तक आरती पूरी कर ली जाती है और इसके बाद ही मुस्लिम भाई मजलिस और गिरोह का कार्यक्रम कर रहे हैं।