हिन्दुत्व की दोबारा व्याख्या करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार

Author: Hindi Khabar
Updated On : 2016-10-25 17:53:16
हिन्दुत्व की दोबारा व्याख्या करने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इंकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संविधान बेंच ने मंगलवार को साफ कर दिया हैं कि वो हिंदुत्व शब्द की दोबारा व्याख्या नहीं करेंगे।

दरअसल, सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने साल 1995 में आए फैसले पर दोबारा विचार करने को लेकर एक याचिका दायर की थी। उनकी मांग थी कि 5 राज्यों में जल्द होने जा रहे चुनाव में राजनीतिक पार्टियों को ‘हिंदुत्व’ के नाम पर वोट मांगने से रोका जाए। लेकिन इस याचिका पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया है।

मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'हम जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 (3) पर सुनवाई कर रहे हैं। इसमें चुनावी फायदे के लिए धर्म, जाति, समुदाय और भाषा के इस्तेमाल को गलत माना गया है। किसी पुराने फैसले में तय किसी शब्द की परिभाषा हमारा विषय नहीं है।'

गौरतलब है कि साल 1995 में दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हिंदुत्व एक जीवन शैली यानि जीने का तरीका है, कोई धर्म नहीं।


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